झारखंड के गुमला जिले के पांदनटोली गांव के रहने वाले रॉबिन मिंज ने अपने कठिन परिश्रम और समर्पण से आईपीएल 2025 में मुंबई इंडियंस के लिए डेब्यू किया, जिससे वे आईपीएल में खेलने वाले पहले आदिवासी क्रिकेटर बन गए हैं।
बचपन से क्रिकेट का जुनून
रॉबिन का क्रिकेट के प्रति प्रेम बचपन से ही था। पांच साल की उम्र में वे जलावन की लकड़ी से बैट बनाकर क्रिकेट खेलते थे। उनके पिता, फ्रांसिस जेवियर मिंज, फौज में थे, जिससे परिवार का पालन-पोषण होता था। रॉबिन की प्रारंभिक शिक्षा नामकुम के मजरेलो कॉन्वेंट स्कूल में हुई, जहां से उन्होंने क्रिकेट कोचिंग की शुरुआत की।
कोचिंग और प्रशिक्षण
रॉबिन ने रांची के सोनेट क्रिकेट क्लब में कोच आसिफ हक के मार्गदर्शन में क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली के कारण उन्हें “झारखंड का क्रिस गेल” कहा जाने लगा। उनकी मेहनत और प्रतिभा ने उन्हें झारखंड अंडर-19 और रणजी टीम में जगह दिलाई।
आईपीएल में चयन और दुर्घटना
2024 की आईपीएल नीलामी में गुजरात टाइटंस ने रॉबिन को 3.6 करोड़ रुपये में खरीदा, जिससे वे सुर्खियों में आए। हालांकि, टूर्नामेंट से पहले एक बाइक दुर्घटना के कारण वे पूरे सीजन से बाहर हो गए। इस दुर्घटना ने उनके करियर को प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पुनर्वास के बाद मैदान में वापसी की।
सफल वापसी और मुंबई इंडियंस में चयन
चोट से उबरने के बाद रॉबिन ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में हरियाणा के खिलाफ 80 गेंदों में 78 रन की पारी खेलकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। 2025 की आईपीएल नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 65 लाख रुपये में खरीदा, जिससे उनका आईपीएल में खेलने का सपना पूरा हुआ।
आईपीएल डेब्यू और आगे की राह
आईपीएल 2025 के तीसरे मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ रॉबिन ने डेब्यू किया। हालांकि, वे केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उनका संघर्ष और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है। रॉबिन की कहानी यह साबित करती है कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
रॉबिन मिंज की यह यात्रा न केवल उनके गांव पांदनटोली, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, मेहनत और लगन से बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।