हाल ही में, ‘थिक हार्ट सिंड्रोम’ या ‘हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी’ (HCM) के मामले भारतीय जनसंख्या में तेजी से बढ़ रहे हैं। इस स्थिति में हृदय की मांसपेशियाँ असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं, जिससे हृदय के रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लगभग 70 लाख लोग इस साइलेंट किलर के जोखिम में हैं।
थिक हार्ट सिंड्रोम क्या है?
हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (HCM) एक आनुवंशिक विकार है, जिसमें हृदय की मांसपेशियाँ मोटी हो जाती हैं। यह मोटापा हृदय की निचली कक्षाओं (वेंट्रिकल्स) को प्रभावित करता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है। कई मामलों में, यह स्थिति बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती है, लेकिन कुछ लोगों में सांस फूलना, सीने में दर्द, धड़कनें तेज होना या बेहोशी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
भारतीयों में बढ़ता खतरा क्यों?
भारतीय उपमहाद्वीप में आनुवंशिक प्रवृत्तियों के कारण HCM का खतरा अधिक देखा गया है। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और मोटापा जैसी स्थितियाँ इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीयों में हृदय रोगों की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे जेनेटिक कारणों के साथ-साथ खराब जीवनशैली और तनाव भरे जीवन का योगदान है। citeturn0search7
लक्षणों पर ध्यान दें
थिक हार्ट सिंड्रोम के लक्षणों में शामिल हैं:
- सांस लेने में कठिनाई
- सीने में दर्द
- अनियमित धड़कनें
- थकान या बेहोशी
यदि आप इनमें से कोई लक्षण महसूस करते हैं, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
सावधानियाँ और रोकथाम
- नियमित स्वास्थ्य जांच: विशेषकर यदि आपके परिवार में हृदय रोगों का इतिहास है, तो नियमित रूप से हृदय की जांच करवाएँ।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और तनाव प्रबंधन से हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखें।
- धूम्रपान और शराब से बचें: ये आदतें हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
थिक हार्ट सिंड्रोम एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय स्थिति है। समय पर निदान और उचित देखभाल से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। अपने हृदय की सेहत का ध्यान रखें और किसी भी असामान्यता पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करें।